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आयकर स्लैब 2021-2022

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  • 14th Feb 2022
  • 1,095

आयकर स्लैब 2021-2022

यह कोई नई एवं आश्चर्यचकित कर देने वाली खबर नहीं है कि भारत में प्रत्येक करदाता एक विशेष स्लैब प्रणाली के अनुसार आयकर का भुगतान करते हैं। अलग-अलग आय श्रेणियों के लिए अलग-अलग कर दरें निर्धारित की जाती हैं और सभी भुगतान इन पूर्व-निर्धारित स्लैब के आधार पर किए जाते हैं। इतना ही नहीं, इस तरह के कर सरकार को एक प्रगतिशील और न्यायसंगत कर प्रणाली बनाने में मदद करते हैं।

भारतीय वित्त मंत्रालय अलग-अलग टैक्स स्लैब और कटौतियों को एक निर्धारित अंतराल पर जारी करता है जिसके परिणामस्वरूप नए प्रारूप तैयार होते हैं। इस प्रकार के समायोजन यह सुनिश्चित करते हैं कि देश और उसके निवासी बड़े तथा वैश्विक स्तर पर होने वाले लगातार बदलते आर्थिक विकास से लाभान्वित हों। निर्धारण वर्ष 2021-22 के लिए आयकर दरों को उन संशोधनों के साथ बदल दिया गया है जो नई कर व्यवस्था के तहत सभी वर्तमान और भविष्य के करदाताओं को प्रभावित कर सकते हैं।

यदि आप करों की धारणा से अपरिचित हैं, तो आप सोच रहे होंगे कि आयकर में निर्धारण वर्ष अथवा आकलन वर्ष किसे कहते हैं? निर्धारण वर्ष की अवधारणा इतनी जटिल नहीं है। यह वर्तमान वित्त वर्ष के ठीक बाद का वर्ष है। वित्तीय वर्ष (financial year) और निर्धारण वर्ष (Assessment Year) दोनों 1 अप्रैल से शुरू होते हैं और 31 मार्च को समाप्त होते हैं। निर्धारण वर्ष वह समय अवधि है, जिसके दौरान एक वित्तीय वर्ष के दौरान उत्पादित आय मूल्यांकन योग्य और कर योग्य होती है।

आयकर जैसे विषय को विस्तार में समझने से पूर्व यह बात ध्यान देने योग्य है कि वर्तमान कर वर्ष 2021-2022 को आकलन वर्ष/निर्धारण वर्ष के रूप में जाना जाता है।

आयकर स्लैब 2020-21 (पुरानी व्यवस्था)

आय स्लैब (₹)

पुरानी व्यवस्था

(छूट और कटौती के साथ)

₹2.5 लाख तक

शून्य

₹2.5 - 5 लाख तक

5%

₹5 - 7.5 लाख तक

20%

₹7.5 - 10 लाख तक

20%

₹10 - 12.5 लाख तक

30%

₹12.5 - 15 लाख तक

15 लाख से अधिक

आयकर स्लैब 2021-22 के तहत बीमा और पेंशन कर

  • धारा 80 सी

पीपीएफ, ईपीएफ, एलआईसी प्रीमियम (जीवन बीमा), इक्विटी-लिंक्ड सेविंग स्कीम, हाउस लोन पर मूल भुगतान, और स्टांप ड्यूटी जैसे सभी निवेश धारा 80 सी के तहत कटौती के लिए मान्य होते हैं। इसका अर्थ यह है की यदि कोई करदाता ऊपर उल्लिखित किसी भी निवेश साधन में निवेश करता है, तो वे कर कटौती का लाभ उठाने के पात्र होंगे।

  • धारा 80 डी

धारा 80 डी के अनुसार कोई भी करदाता अपने, अपने जीवनसाथी और बच्चों के स्वास्थ्य बीमा के लिए ₹25,000 तक के कर कटौती का लाभ उठा सकता है। इसके अलावा, यदि करदाता एक वरिष्ठ नागरिक हैं तो वह ₹50,000 तक की कटौती के पात्र होंगे।

  • धारा 80 जी

इस धारा के नियमों और प्रावधानों के अनुसार, विभिन्न गैर-लाभकारी संगठनों (नॉन-प्रॉफिट आर्गेनाइजेशन) को कर-कटौती योग्य निवेश की अनुमति होती है।

  • धारा 80 सीसीडी

इस धरा के तहत, एनपीएस (NPS) खाते में निवेश किए गए धनराशि के लिए, ₹50,000 की वृद्धिशील कटौती की अनुमति है।

आयकर स्लैब 2021-22 (नई व्यवस्था)

कर स्लैब

नई आयकर व्यवस्था

₹2.5 लाख तक

शुन्य

₹2.5 लाख - ₹5 लाख

कुल आय का 5%

₹5 लाख - ₹7.5 लाख

₹12,500 + कुल आय का 10%

₹7.5 लाख - ₹10 लाख

₹37,500 + कुल आय का 15%

₹10 लाख - ₹12.5 लाख

₹75,000 + कुल आय का 20%

₹12.5 लाख - ₹15 लाख

₹1,25,000 + कुल आय का 25%

₹15 लाख से अधिक

₹1,87,5000 + कुल आय का 30%

कटौतियाँ जिनका दावा नई व्यवस्था के तहत नहीं किया जा सकता

नई कर व्यवस्था के तहत, कई कटौती और छूट अब मान्य नहीं हैं। यदि आप वेतनभोगी व्यक्ति, व्यवसाय या किसी भी अन्य पेशे से वेतन कमाते हैं, तो नीचे दी गई सूची में मौजूद सभी कटौतियाँ नई कर प्रणाली के अनुसार मान्य नहीं होंगी।

  • वेतनभोगी व्यक्तियों द्वारा ₹50,000 की मानक कटौती का दावा
  • एलटीए (Leave Travel Allowance)
  • वेतन और किराए की राशि के आधार पर एचआरए (House Rent Allowance)
  • अधिकतम ₹2,500/- का व्यावसायिक कर (Professional Tax)
  • धारा 80TTA और 80TTB के तहत उपलब्ध कटौती जो बचत खाते/जमा से प्राप्त ब्याज होता है
  • मनोरंजन भत्ते पर कर कटौती और सरकारी कर्मचारियों के लिए पेशेवर कर पर कटौती
  • स्व-अधिकृत या किसी खाली संपत्ति के लिए गृह ऋण पर देय ब्याज राशि
  • धारा 57 के खंड (ii) (ए) के तहत पारिवारिक पेंशन से ₹15,000 की कटौती
  • व्यावसायिक पेशेवरों द्वारा धारा 10एए के तहत विशेष आर्थिक क्षेत्रों को छूट का नुकसान
  • आयकर अधिनियम की धारा 32AD, 33AB, 33ABA, 35(1)(ii),35(1)(ii((a), 35(1)(iii), 35(2AA), 35AD और 35CCC) के अनुसार कटौती
  • आयकर अधिनियम की धारा 32(ii) (ए) के अनुसार अतिरिक्त मूल्यह्रास
  • पिछले वर्षों के मूल्यह्रास को आगे बढ़ाने या अवशोषित करने का विकल्प
  • अध्याय VI-A, 80C, 80D, 80E, 80CCC, 80CCD, 80D, 80DD, 80DDB, 80EE, 80EEA, 80EEB, 80G, 80GG, 80GGA, 80GGC, 80IA, 80-IAB, 80-IAC 80-आईबी, 80-आईबीए, आदि के तहत कर-बचत निवेश कटौती। इनमें ईएलएसएस, एनपीएस, मेडिक्लेम बीमा प्रीमियम पर पीपीएफ कर राहत, एफडीआर आदि शामिल हैं।
  • धारा 10(14) के अनुसार निम्नलिखित भत्तों को छोड़कर बाकी सभी भत्तें:
  • विकलांग कर्मचारी को दिया गया परिवहन भत्ता
  • वाहन भत्ता
  • दौरे या स्थानांतरण लागत पर किसी कर्मचारी की यात्रा को पूरा करने के लिए भत्ते
  • डीए (Daily Allowance)
  • अनुलाभ

आईटी अधिनियम के तहत व्यक्तिगत करदाताओं का वर्गीकरण

  • निवासी और अनिवासी - 60 वर्ष से कम आयु
  • निवासी - 60 से 80 वर्ष की आयु के लोग या वरिष्ठ नागरिक
  • निवासी - 80 वर्ष से अधिक आयु के लोग या अति वरिष्ठ नागरिक

वरिष्ठ नागरिकों के लिए टैक्स स्लैब (60-80 वर्ष)

कुल आय

नई आयकर व्यवस्था

(कटौती और छूट के बिना)

₹2.5 लाख तक

शुन्य

₹2.5 लाख से ₹5 लाख तक

5%

₹5 लाख से ₹7.5 लाख तक

10%

₹7 लाख से ₹10 लाख तक

15%

₹10 लाख से ₹12.5 लाख तक

20%

₹12.5 लाख से ₹15 लाख तक

25%

₹15 लाख से

30%

अति वरिष्ठ नागरिक के लिए टैक्स स्लैब (80 वर्ष से अधिक)

कुल आय

नई आयकर व्यवस्था

(कटौती और छूट के बिना)

₹2.5 लाख तक

शुन्य

₹2.5 लाख से ₹5 लाख तक

5%

₹5 लाख से ₹7.5 लाख तक

10%

₹7 लाख से ₹10 लाख तक

15%

₹10 लाख से ₹12.5 लाख तक

20%

₹12.5 लाख से ₹15 लाख तक

25%

₹15 लाख से

30%

एचयूएफ (HUF) के लिए टैक्स स्लैब

वार्षिक आय

नई कर व्यवस्था

पुरानी कर व्यवस्था

₹2.5 लाख तक

छूट

छूट

₹2.5 लाख से ₹5 लाख तक

5%

5%

₹5 लाख से ₹7.5 लाख तक

10%

20%

₹7 लाख से ₹10 लाख तक

15%

20%

₹10 लाख से ₹12.5 लाख तक

20%

30%

₹12.5 लाख से ₹15 लाख तक

25%

30%

₹15 लाख से

30%

30%

घरेलू कंपनी के लिए टैक्स स्लैब

घरेलू कंपनी

निर्धारण वर्ष 2020-21

निर्धारण वर्ष 2021-22

वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए कुल कारोबार/सकल प्राप्ति ₹400 करोड़ तक

25%

शुन्य

वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए ₹400 करोड़ तक का कुल कारोबार/सकल प्राप्ति

शुन्य

25%

कोई अन्य घरेलू कंपनी

30%

30%

नई कर व्यवस्था में वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए कुछ आवश्यक आयकर कटौती भी शामिल है, जो नीचे दी गई हैं:

गृह संपत्ति से किराये की आय

धारा 24 आपको अपनी आवासीय संपत्ति की आय से गृह ऋण या गृह सुधार ऋण पर भुगतान किए गए ब्याज को काटने की अनुमति देती है। आयकर नियमों के अनुसार, स्व-अधिकृत आवास के लिए गृह गिरवी पर किए गए ब्याज के लिए अधिकतम कटौती ₹ 2 लाख है।

स्वस्थ पॉलिसी प्रीमियम

स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम और निवारक स्वास्थ्य जांच के लिए भुगतान किए गए खर्चों की कटौती धारा 80डी के तहत पुनः प्राप्त की जा सकती है।

ई-वाहन ऋण

धारा 80EEB के तहत इलेक्ट्रिक वाहन की खरीद के लिए बंधक पर ब्याज शुल्क पर ₹ 1.5 लाख तक की कटौती की मांग की जा सकती है।

केंद्रीकृत पेंशन योजनाएं

नई कर व्यवस्था के तहत, केंद्र सरकार की पेंशन योजना में किए गए योगदान के लिए धारा 80 सीसीडी (1बी) के तहत ₹50,000 तक की कटौती प्राप्त की जा सकती है।

नए और पुराने आयकर स्लैब में अंतर

आय स्लैब (₹)

पुरानी व्यवस्था

(छूट और कटौती के साथ)

नई व्यवस्था

(छूट और कटौती के बिना)

₹2.5 लाख तक

शून्य

शून्य

₹2.5 लाख से ₹5 लाख तक

5%

5%

₹5 लाख से ₹7.5 लाख तक

20%

10%

₹7 लाख से ₹10 लाख तक

20%

15%

₹10 लाख से ₹12.5 लाख तक

30%

20%

₹12.5 लाख से ₹15 लाख तक

25%

₹15 लाख से

30%

आप क्या चुनेंगे: पुरानी या नई कर व्यवस्था?

यहाँ उत्तर बहस का विषय है और ईमानदारी से कहा जाए तो इस प्रश्न का कोई सही या गलत उत्तर नहीं है। यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी वित्तीय स्थिति कैसी है और आप सालाना आधार पर कितना कमाते हैं। दोनों कर वशताओं व्यवस्थाओं - पुरानी और नई के अपने-अपने पक्ष और विपक्ष हैं। हालांकि वित्तीय विशेषज्ञ और सलाहकार यह सलाह देते हैं कि आप किस तरह के दावों या छूटों में रुचि रखते हैं, इस पर ध्यान देने से पहले उचित तुलना करें, और उसके बाद ही आपको अपनी कर फाइलिंग के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

नई कर व्यवस्था चुनने से पहले ध्यान रखने योग्य बातें

  • नई कर व्यवस्था के अनुसार, आयकर अधिनियम की धारा 80 सीसीडी (2) के तहत कटौती की अनुमति है (यहां, नियोक्ता कर्मचारियों की राष्ट्रीय पेंशन योजना में योगदान देता है)। अनुमत अधिकतम कटौती 10% है।
  • नई कर व्यवस्था वरिष्ठ और अति वरिष्ठ नागरिकों के लिए उच्च कर कटौती की अनुमति नहीं देती है।
  • आयकर अधिनियम की धारा 87A के अनुसार, अधिकतम ₹ 12,500 की छूट की अनुमति है।
  • आपको अपने नियोक्ता को एक घोषणा पत्र के माध्यम से सूचित करना होगा कि आप नई कर व्यवस्था का चयन कर रहे हैं।
  • जहां तक टीडीएस का संबंध है, आप एक वित्तीय वर्ष में व्यवस्थाओं के बीच बदलाव नहीं कर सकते।

निष्कर्ष यह है कि निर्धारण वर्ष 2021-22 के लिए आयकर दरों ने देश के आर्थिक ढांचे में एक महत्वपूर्ण बदलाव को चिह्नित किया है। इन नए कर स्लैब और कटौती के साथ, नई आयकर व्यवस्था और इसकी पूरी क्षमता का पता लगाया जाना बाकी है। हम केवल समय के साथ और जानेंगे!

- A Consumer Education Initiative series by Kotak Life

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